पुस्तकें

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1 नयी कविता स्वरूप और समस्याएँ नयी कविता’ ने अपने प्रकाशन-वर्ष 1954 ई0 से वर्तमान समय तक यानी लगभग दो-ढाई दशक में, प्रगतिवाद और प्रयोगवाद के सार्थक तत्वों को अपने में समाहित करके भी वाद-मुक्त धरातल का निर्माण किया जो निश्चय ही एक कठिन कार्य था। प्राचीन रूढ़ियों एवं निर्जीव मान्यताओं से काव्य को मुक्ति दिलाने के, निराला आदि द्वारा चलाये गये अभियान को एक आन्दोलन का रूप देकर मुक्त-छन्द को व्यापक मान्यता दिलायी तथा उसे नयी अभिव्यक्ति के स्वाभाविक माध्यम के रूप में प्रतिष्ठित किया। Download
2 Anthology of jagdish gupta's poems Dr.Gupta was a gifted painter, sketch artist, draughtsman, or portrait maker, I came to know his candid protraits. they lay scattered all over his large home, peeping out of his library as bookmarks. Download
3 वासूनामा भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन डॉ0 गुप्त में गहरे पैठे हुए थे तथा इनमें उनकी अटूट आस्था थी। Download
4 भारतीय कला के पदचिह्न वास्तविक कलाकार एक ही चीज़ से विद्रोह करता है, और वह है, निर्जीवता | सजीवता चाहे जिस रूप में भी हो, कलाकार को सदा आकृष्ट करती है और परम्परा भी वास्तव में सजीवता की ही होती है; निर्जीवता की कोई परम्परा नहीं होती | Download
5 शान्ता राम की बहन (संवाद-काव्य) 'शान्ता' मेरे भीतर प्रेरणा के रूप में इतनी जाग्रत रही कि रोग-शय्या भी मुझे परास्त नहीं कर सकी | मैं अपनी जिजीविषा के साथ बच ही गया | शान्ता और राम के अभेद का मुझे प्रत्यक्ष अनुभव हुआ | Download
6 रीतिकाव्य मेरा 'रीतिकाव्य-संग्रह' बहुतों के द्वारा अपनाया गया और देश-विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों में पाठय-क्रम में निर्धारित है | उसके जिस भूमिका-भाग ने लोगों को अधिक आकृष्ट किया उसे स्वतंत्र रूप से प्रकाशित करने का सुझाव भी उन्हीं के द्वारा प्राप्त हुआ | Download
7 रीतिकाव्य-संग्रह ब्रजभाषा-काव्य का संस्कार मेरे मन पर अत्यन्त प्रारम्भिक अवस्था में और इतनी गहराई के साथ पड़ा कि उसने मुझमें न केवल ब्रजभाषा-काव्य का प्रेम उत्पन्न किया, वरन मुझे ब्रजभाषा का कवि तक बना दिया। Download
8 गुजराती और ब्रजभाषा कृष्ण-काव्य का तुलनात्मक अध्ययन मध्यकाल में महान् भक्ति आन्दोलन से अनुप्रेरित होकर राम और कृष्ण सम्बन्धी जो विशाल साहित्य निर्मित हुआ वह हिन्दी, बंगला, मराठी, गुजराती आदि सभी भाषाओं में उपलब्ध होता है Download
9 ब्रजभाषा कृष्ण-भक्ति काव्य ब्रजभाषा में कृष्ण सम्बंधी अधिकांश काव्य-रचना सम्प्रदायों के अंतर्गत हुई | इन सम्प्रदायों में वल्लभ, राधावल्लभ, गौड़ीय, निम्बार्क तथा हरिदासी सम्प्रदाय प्रमुख हैं | Download
10 कुम्भ-दर्शन कुम्भ-पर्व आत्ममंथन को समुद्र-मंथन का रुपक देकर अमृत-कलश की कल्पना लोक-जीवन में साकार करने में सफल रहा है || कुम्भ-दर्शन मेरे निकट आत्म-दर्शन का पर्याय हो गया इसीलिए मैंने उसके लिखने का दायित्व स्वीकार किया | Download
11 माँ के लिए यह जो दीवार-घड़ी है उस पर एक उदास गौरया रोज़ शाम से आकर गुपचुप बैठी रहती Download
12 नाव के पाँव नीचे नीर का विस्तार ऊपर बादलों की छाँव, चल रही है नाव; चल रही है नाव Download
13 सांझ जिस दिन से संज्ञा आई छा गई उदासी मन में, ऊषा के दृग खुलते ही हो गई सांझ जीवन में। Download
14 युग्म व्यक्ति के लिए व्यक्ति की चाह एक सुगंधित राह । नारी को जन्मतः निकृष्ट मानकर किसी भी प्रकार के स्वस्थ मानव सम्बन्ध का विकास नहीं हो सकता। Download
15 शब्द दंश आज कविता का आग्रह सौंदर्य की अपेक्षा सत्य पर अधिक दिखायी दे रहा है | Download
16 प्रागैतिहासिक भारतीय चित्रकला योरोप में अत्यन्त पुरातन शिला-चित्र खोजे जा चुके हैं, उनसे भी अधिक पुराने चित्र Download
17 जयंत किसी जाग्रत रचना-क्षण में अचानक शचीन्द्र-पुत्र जयन्त के प्रसंग ने मुझे स्त्री-पुरूष सम्बन्ध को सर्वथा नये आयाम से देखने की प्रेरणा दी Download
18 हिम-विद्ध शब्दहीन अट्टहास राशीभूत कानों ने नहीं - मुग्ध आँखों ने सुना Download
19 गोपा गौतम काव्य-रचना के सन्दर्भ में नयी कविता ने मुझे निरन्तर नयी विचारणा की प्रेरणा दी है। Download
20 शम्बूक मैंने शम्बूक को 'हरिजन' की अपेक्षा 'भूमि-पुत्र' के रूप में प्रस्तुत करना इसलिए अधिक श्रेयकर समझा है कि उसकी संगति आधुनिक विचारधारा से पूरी तरह लग जाती है जबकि भक्ति-आंदोलन की देन के रूप में 'हरिजन' शब्द अच्छे वर्ष का द्योतक होते हुए भी मूलतः मध्यकालीन मनोवृत्ति का ही परिचय देता है। Download
21 कवितान्तर कविता की महत्ता का एक अन्य कारण यह भी है कि वह साक्षात्कार की वाणी का सहजतम एवं शुद्धतम रूप बनकर सामने आती रही है और आज के या आगामी युग के मानव को ऐसे साक्षात्कार की आवश्यकता नहीं पड़ेगी ऐसा कौन कह सकता है। Download
22 बोधि वृक्ष बुद्ध के जीवन को काव्य का विषय बनाने के पीछे मेरे मन में अनेक प्रकार के प्रेरणा-सूत्र Download
23 बहु लोचना नदी कम शब्दों में अधिक अर्थ सहेजना कवि-कर्म की कसौटी रहा है | 'अरथ अमित अति आखर थोरे' के रूप में मानसकार ने इसे पहले ही मान्यता दे दी है | Download
24 अक्रोश के पंजे “आक्रोश के पंजे” की कविताएँ किसी भूमिका की अपेक्षा नहीं रखतीं। उनके भीतर जो कुछ है वह अपनी बात स्वयं कहने की शक्ति रखता है। Download
25 आधुनिक कवि : जगदीश गुप्त इस काव्य-संग्रह की सारी कविताएँ डॉ0 गुप्त ने स्वयं चुनी है। और अब उन्हें अकरादि-क्रम से प्रकाशित किया जा रहा है। डॉ0 जगदीश गुप्त का व्यक्तित्व, कृतित्व का संक्षिप्त परिचय भी इस संग्रह में है। सम्मेलन कृतित्व को ही अपना वाङ्मय-मधुपर्क प्रदान किया करता है। Download
26 नयी कविता नयी कविता के आठ खण्डों को तीन खण्डों में प्रकाशित करने की योजना इसलिए बनायी गयी कि उसके सभी पक्ष काव्य मनीषियों के समक्ष उद्घाटित सकें। Download
27 आदिम एकांत भटकनों में अर्थ होता है |टूटना कब व्यर्थ होता है | ज़िंदगी कच्चे घड़े-सी है, आँच देकर हर विषम अनुभव पकाता है, Download